
नई दिल्ली। भारत का शहरी और आधुनिक समाज अब पारंपरिक वैवाहिक ढांचे से परे जाकर संबंधों की नई परिभाषाएँ गढ़ रहा है। इस बदलाव की लहर में, एक नया रिलेशनशिप ट्रेंड तेज़ी से लोकप्रियता हासिल कर रहा है, जिसे ‘लिविंग अपार्ट टुगेदर’ (LAT) कहा जाता है। LAT की अवधारणा उन शादीशुदा जोड़ों पर लागू होती है जो एक-दूसरे से प्यार, विश्वास और प्रतिबद्धता का गहरा रिश्ता रखते हैं, लेकिन अपनी मर्जी से अलग-अलग घरों में रहना चुनते हैं।
क्यों बढ़ रहा है LAT का चलन?
रिलेशनशिप विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि LAT का चलन मुख्य रूप से मिलेनियल्स (Millennials) और जेन-जी (Gen Z) पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हो रहा है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता और ‘स्पेस’: आज के युवा अपनी पहचान और व्यक्तिगत स्पेस को सबसे ऊपर रखते हैं। अलग रहने से वे अपने शौक, दोस्त और दिनचर्या को बिना किसी समझौते के जी पाते हैं, जिससे रिश्ते में घुटन नहीं आती।
- करियर और पेशेवर प्रतिबद्धताएँ: कई कपल्स अलग-अलग शहरों या क्षेत्रों में नौकरी करते हैं। LAT उन्हें अपने करियर को प्राथमिकता देने और लंबी दूरी के आवागमन से बचने का व्यावहारिक समाधान देता है।
- पारंपरिक जिम्मेदारियों से बचाव: LAT कपल पारंपरिक वैवाहिक जिम्मेदारियों, जैसे कि ससुराल वालों के साथ संयुक्त रूप से रहना या घरेलू कार्यों के बंटवारे के दबाव से बचते हैं, जिससे उनके बीच होने वाले अनावश्यक झगड़े कम होते हैं।
- संबंधों की गुणवत्ता: कई LAT कपल्स का मानना है कि अलग रहने से वे अपने रिश्ते को ‘डेटिंग फेज’ जैसा रोमांचक बनाए रख पाते हैं। वे अपनी सुविधा के अनुसार मिलते हैं, जिससे बिताया गया समय उच्च गुणवत्ता वाला और सार्थक होता है।
भारतीय विवाह की बदलती परिभाषा
LAT की बढ़ती स्वीकार्यता यह स्पष्ट संकेत है कि भारतीय विवाह की परिभाषा अब केवल ‘एक छत के नीचे साथ रहने’ तक सीमित नहीं रही है। यह रिश्ता अब स्वतंत्रता, व्यक्तिगत लक्ष्यों और आपसी सम्मान के इर्द-गिर्द घूम रहा है। LAT में कमिटमेंट (प्रतिबद्धता) की कमी नहीं होती, बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्था है जहाँ कपल अपनी शर्तों पर प्यार को निभाना चाहते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ट्रेंड रिश्ते को कमजोर नहीं करता, बल्कि अक्सर इसे और मजबूत बनाता है, क्योंकि कपल भावनात्मक जुड़ाव को भौगोलिक समीपता से अधिक महत्व देते हैं। हालांकि, इसके लिए दोनों पार्टनर्स के बीच उच्च स्तर का विश्वास, स्पष्ट संवाद और आर्थिक स्वतंत्रता अनिवार्य है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय समाज इस नई वैवाहिक व्यवस्था को भविष्य में किस प्रकार अपनाता है।